हरित क्रांति: किससे संबंधित है और भारत पर इसका क्या प्रभाव है?

by Olex Johnson 63 views
# हरित क्रांति किससे संबंधित है?

नमस्ते! आज हम बात करेंगे कि *हरित क्रांति* किससे संबंधित है और इसने भारत में कृषि को कैसे बदल दिया। यदि आप जानना चाहते हैं कि *green revolution* का मुख्य उद्देश्य क्या था, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। हम आपको सरल भाषा में समझाएंगे।

## सही उत्तर

**हरित क्रांति मुख्य रूप से कृषि उत्पादन में वृद्धि से संबंधित है, विशेष रूप से गेहूं और चावल जैसे अनाजों के उत्पादन में।**

## विस्तृत स्पष्टीकरण

*हरित क्रांति* एक ऐसी अवधि थी जब भारत में कृषि को आधुनिक तकनीकों और उच्च उपज देने वाले बीजों (High Yielding Varieties - HYVs) के उपयोग से रूपांतरित किया गया था। इसका मुख्य लक्ष्य था देश को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना। यह क्रांति 1960 के दशक में शुरू हुई और इसने भारतीय कृषि को एक नया रूप दिया।

### मुख्य अवधारणाएँ

*   **उच्च उपज देने वाले बीज (HYVs):** ये विशेष प्रकार के बीज होते हैं जो सामान्य बीजों की तुलना में अधिक फसल पैदा करते हैं। इन बीजों को उर्वरकों और सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन ये अधिक उत्पादन देने में सक्षम होते हैं।
*   **उर्वरक (Fertilizers):** ये रासायनिक या प्राकृतिक पदार्थ होते हैं जो मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है।
*   **सिंचाई (Irrigation):** यह फसलों को पानी देने की प्रक्रिया है। हरित क्रांति में, सिंचाई के लिए नहरों, ट्यूबवेलों और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया।

### हरित क्रांति की शुरुआत

*हरित क्रांति* की शुरुआत 1960 के दशक में हुई, जब भारत खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था। उस समय, भारत सरकार ने कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक योजना बनाई, जिसके तहत देश में उच्च उपज देने वाले बीजों का उपयोग करके कृषि उत्पादन को बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इस क्रांति के जनक डॉ. नॉर्मन बोरलॉग (Dr. Norman Borlaug) माने जाते हैं, जिन्होंने गेहूं की उन्नत किस्मों को विकसित किया। भारत में, डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन (Dr. M. S. Swaminathan) ने इस क्रांति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

### हरित क्रांति के मुख्य घटक

*   **उच्च उपज देने वाले बीजों का उपयोग:** *Green revolution* में सबसे महत्वपूर्ण घटक उच्च उपज देने वाले बीजों का उपयोग था। इन बीजों से गेहूं, चावल और मक्का जैसी फसलों का उत्पादन कई गुना बढ़ गया।
*   **उर्वरकों का उपयोग:** HYVs बीजों को अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, इसलिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ा। इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिले।
*   **सिंचाई की सुविधाएँ:** फसलों को समय पर पानी देना बहुत जरूरी है, इसलिए सिंचाई की सुविधाओं का विकास किया गया। नहरों, ट्यूबवेलों और स्प्रिंकलर सिस्टम के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाया गया।
*   **कीटनाशकों का उपयोग:** फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए कीटनाशकों का उपयोग किया गया। इससे फसलों की बर्बादी कम हुई और उत्पादन में वृद्धि हुई।
*   **कृषि मशीनरी का उपयोग:** ट्रैक्टर, थ्रेशर और हार्वेस्टर जैसी कृषि मशीनरी का उपयोग बढ़ा, जिससे कृषि कार्य आसान और तेजी से होने लगा।

### हरित क्रांति के प्रभाव

*हरित क्रांति* ने भारत में कृषि उत्पादन को कई गुना बढ़ा दिया। इसके कुछ महत्वपूर्ण प्रभाव इस प्रकार हैं:

*   **खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि:** *Green revolution* के कारण गेहूं और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई। भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन गया और उसे विदेशों से अनाज आयात करने की आवश्यकता नहीं रही।
*   **किसानों की आय में वृद्धि:** कृषि उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि हुई। वे अधिक मुनाफा कमाने लगे और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
*   **रोजगार के अवसर:** *Green revolution* ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए। कृषि मशीनरी के उपयोग और उर्वरकों के उत्पादन से संबंधित उद्योगों में रोजगार बढ़ा।
*   **गरीबी में कमी:** कृषि उत्पादन बढ़ने और किसानों की आय में वृद्धि होने से गरीबी में कमी आई। लोग बेहतर जीवन जीने लगे और उनकी जीवन स्तर में सुधार हुआ।

### हरित क्रांति की आलोचना

हालांकि *green revolution* ने भारत को कई फायदे पहुंचाए, लेकिन इसकी कुछ आलोचनाएँ भी हैं:

*   **पर्यावरण पर प्रभाव:** उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी और पानी का प्रदूषण बढ़ा। इससे पर्यावरण को नुकसान हुआ और मिट्टी की उर्वरता कम हो गई।
*   **छोटे किसानों पर प्रभाव:** *Green revolution* का लाभ बड़े किसानों को अधिक मिला, जबकि छोटे किसान आधुनिक तकनीकों और महंगे बीजों का उपयोग करने में असमर्थ रहे। इससे अमीर और गरीब किसानों के बीच की खाई और बढ़ गई।
*   **पानी की कमी:** सिंचाई के लिए अत्यधिक पानी के उपयोग से कई क्षेत्रों में पानी की कमी हो गई। इससे जल संकट की समस्या उत्पन्न हो गई।

### हरित क्रांति 2.0

आज, हम *हरित क्रांति 2.0* की बात कर रहे हैं, जिसमें सतत कृषि (Sustainable Agriculture) पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कृषि उत्पादन को बढ़ाना है। इसमें जैविक खेती (Organic Farming), जल प्रबंधन और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने जैसे उपाय शामिल हैं।

*हरित क्रांति* ने निश्चित रूप से भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन हमें इसके नकारात्मक प्रभावों को भी ध्यान में रखना होगा। सतत कृषि के माध्यम से, हम भविष्य में कृषि को और भी बेहतर बना सकते हैं।

## मुख्य बातें

*   *हरित क्रांति* कृषि उत्पादन में वृद्धि से संबंधित है।
*   उच्च उपज देने वाले बीज, उर्वरक और सिंचाई इसके मुख्य घटक हैं।
*   इसने भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं।
*   *हरित क्रांति 2.0* सतत कृषि पर केंद्रित है।

आशा है कि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी होगी! यदि आपके कोई और प्रश्न हैं, तो बेझिझक पूछें।