छंद: परिभाषा, भेद और उदाहरण | हिंदी व्याकरण

by Olex Johnson 44 views

नमस्ते! इस लेख में, हम छंद के बारे में विस्तार से जानेंगे। यदि आपके मन में यह सवाल है कि छंद क्या है, इसके कितने भेद हैं, और प्रत्येक भेद के उदाहरण क्या हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। हम इस विषय को सरल भाषा में समझेंगे ताकि आपको कोई भी संदेह न रहे।

सही उत्तर

छंद, काव्य की रचना करने की एक प्रणाली है जिसमें वर्णों, मात्राओं, विरामों, और लय का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके मुख्यतः दो भेद हैं: मात्रिक छंद और वर्णिक छंद।

विस्तृत स्पष्टीकरण

छंद, हिंदी साहित्य और काव्यशास्त्र का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह कविता को एक विशेष लय और ताल प्रदान करता है, जिससे कविता सुनने और पढ़ने में अधिक मधुर और आकर्षक लगती है। छंद के ज्ञान के बिना, कविता में सौंदर्य और संगीतात्मकता लाना मुश्किल है। आइए, छंद के बारे में विस्तार से समझते हैं:

छंद की परिभाषा

छंद का शाब्दिक अर्थ है ‘बंधन’। यह काव्य रचना की वह प्रणाली है जिसमें अक्षरों, मात्राओं, विरामों, और लय का एक निश्चित नियम होता है। छंद में वर्णों और मात्राओं की संख्या निश्चित होती है, और उनका क्रम भी तय होता है। इसी नियमबद्धता के कारण कविता में संगीतात्मकता और लय उत्पन्न होती है।

छंद के तत्व

छंद के मुख्य तत्व निम्नलिखित हैं:

  1. वर्ण: वर्ण अक्षर को कहते हैं। हिंदी में दो प्रकार के वर्ण होते हैं: ह्रस्व (लघु) और दीर्घ (गुरु)।
  2. मात्रा: मात्रा वर्णों के उच्चारण में लगने वाले समय को कहते हैं। ह्रस्व वर्ण की एक मात्रा होती है और दीर्घ वर्ण की दो मात्राएँ होती हैं।
  3. यति: यति का अर्थ है विराम या ठहराव। छंद में कुछ निश्चित स्थानों पर विराम लेना होता है, जिससे लय बनी रहती है।
  4. गति (लय): गति छंद की लय को कहते हैं। प्रत्येक छंद में एक निश्चित गति होती है जो कविता को मधुर बनाती है।
  5. तुक: तुक का अर्थ है अंतिम वर्णों की समानता। कविता के अंत में समान वर्णों का प्रयोग तुक कहलाता है, जिससे कविता में सौंदर्य आता है।

छंद के भेद

छंद के मुख्यतः दो भेद होते हैं:

  1. मात्रिक छंद: मात्रिक छंद वे छंद होते हैं जिनमें मात्राओं की संख्या निश्चित होती है। इन छंदों में वर्णों की संख्या का कोई नियम नहीं होता, केवल मात्राओं की संख्या पर ध्यान दिया जाता है।
  2. वर्णिक छंद: वर्णिक छंद वे छंद होते हैं जिनमें वर्णों की संख्या निश्चित होती है। इन छंदों में मात्राओं की संख्या का कोई विशेष नियम नहीं होता, केवल वर्णों की संख्या पर ध्यान दिया जाता है।

अब हम इन दोनों भेदों को विस्तार से समझेंगे:

1. मात्रिक छंद

मात्रिक छंदों में मात्राओं की गिनती महत्वपूर्ण होती है। ये छंद तीन प्रकार के होते हैं:

  • सम मात्रिक छंद: जिन छंदों के सभी चरणों में मात्राओं की संख्या समान होती है, उन्हें सम मात्रिक छंद कहते हैं।
    • उदाहरण: चौपाई
      • चौपाई के प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं।
      • उदाहरण:
        • जय हनुमान ज्ञान गुन सागर,
        • जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।
        • (प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएँ)
  • अर्धसम मात्रिक छंद: जिन छंदों के पहले और तीसरे चरण में तथा दूसरे और चौथे चरण में मात्राओं की संख्या समान होती है, उन्हें अर्धसम मात्रिक छंद कहते हैं।
    • उदाहरण: दोहा
      • दोहा के पहले और तीसरे चरण में 13 मात्राएँ और दूसरे और चौथे चरण में 11 मात्राएँ होती हैं।
      • उदाहरण:
        • मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ, (13 मात्राएँ)
        • जा तन की झाँई परे, स्याम हरित दुति होइ। (11 मात्राएँ)
  • विषम मात्रिक छंद: जिन छंदों के चरणों में मात्राओं की संख्या असमान होती है, उन्हें विषम मात्रिक छंद कहते हैं।
    • उदाहरण: कुंडलिया
      • कुंडलिया छंद में 6 चरण होते हैं। इसके पहले चरण में 13 मात्राएँ और दूसरे चरण में 11 मात्राएँ होती हैं।

2. वर्णिक छंद

वर्णिक छंदों में वर्णों की संख्या महत्वपूर्ण होती है। इन छंदों में वर्णों की गिनती और क्रम निश्चित होता है। वर्णिक छंदों के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  • सवैया: सवैया एक वर्णिक छंद है जिसमें 22 से 26 वर्ण होते हैं। इसके कई भेद हैं, जैसे मतगयंद सवैया, दुर्मिल सवैया आदि।
    • उदाहरण:
      • मानुस हौं तो वही रसखान, बसौं मिलि गोकुल गाँव के ग्वारन।
      • जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन।।
  • कवित्त: कवित्त एक वर्णिक छंद है जिसमें प्रत्येक चरण में 31 वर्ण होते हैं।
    • उदाहरण:
      • सेस महेस गनेस दिनेस सुरेसहु जाहि निरंतर गावैं।
      • जाहि अनादि अनंत अखंड अछेद अभेद बतावैं।।

कुछ अन्य महत्वपूर्ण छंद

  1. रोला: रोला एक मात्रिक छंद है जिसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं।
    • उदाहरण:
      • जो जग हित पर प्राण न्योछावर है कर पाता,
      • जिसका तन है किसी लोक हित में लग जाता।
  2. उल्लाला: उल्लाला एक अर्धसम मात्रिक छंद है जिसके पहले और तीसरे चरण में 15 मात्राएँ और दूसरे और चौथे चरण में 13 मात्राएँ होती हैं।
    • उदाहरण:
      • करते अभिषेक पयोद हैं, बलिहारी इस वेश की।
      • हे मातृभूमि! तू सत्य ही, सगुण मूर्ति सर्वेश की।
  3. छप्पय: छप्पय एक विषम मात्रिक छंद है जो रोला और उल्लाला के मेल से बनता है। इसके पहले चार चरण रोला के और अंतिम दो चरण उल्लाला के होते हैं।
    • उदाहरण:
      • नीलाम्बर परिधान हरित पट पर सुंदर है,
      • सूर्य चन्द्र युग मुकुट मेखला रत्नाकर है।

छंद का महत्व

छंद का काव्य में बहुत महत्व है। इसके कुछ मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  • लय और ताल: छंद कविता को एक विशेष लय और ताल प्रदान करता है, जिससे कविता सुनने और पढ़ने में अधिक मधुर लगती है।
  • सौंदर्य: छंद कविता में सौंदर्य और आकर्षण लाता है। यह कविता को अधिक प्रभावशाली बनाता है।
  • अभिव्यक्ति: छंद कवि को अपनी भावनाओं और विचारों को बेहतर ढंग से व्यक्त करने में मदद करता है।

मुख्य बातें

इस लेख में हमने छंद के बारे में विस्तार से जाना। मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • छंद काव्य रचना की वह प्रणाली है जिसमें वर्णों, मात्राओं, विरामों, और लय का एक निश्चित नियम होता है।
  • छंद के मुख्य तत्व वर्ण, मात्रा, यति, गति, और तुक हैं।
  • छंद के मुख्यतः दो भेद हैं: मात्रिक छंद और वर्णिक छंद।
  • मात्रिक छंदों में मात्राओं की संख्या निश्चित होती है, जबकि वर्णिक छंदों में वर्णों की संख्या निश्चित होती है।

हमें उम्मीद है कि यह लेख आपको छंद क्या है और इसके भेदों को समझने में मददगार साबित होगा। यदि आपके कोई और प्रश्न हैं, तो कृपया पूछने में संकोच न करें। धन्यवाद!